पंचमुखी रुद्राक्ष भगवान शिव के पांच मुखों का प्रतिनिधित्व करता है – सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्त्वपुरुष, और ईशान। यह रुद्राक्ष न केवल आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है, बल्कि मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है।
यह रुद्राक्ष हर उम्र और हर वर्ग के व्यक्ति के लिए उपयुक्त है — विशेष रूप से विद्यार्थियों, साधकों, नौकरीपेशा और गृहस्थों के लिए।
लाभ:
ध्यान और साधना में सहायता
मानसिक एकाग्रता और स्थिरता
रक्तचाप और हृदय रोग में लाभकारी
पापों का नाश और कर्मों की शुद्धि
पंचदेवों की कृपा प्राप्ति
धारण विधि:
🔱 रुद्राक्ष धारण करने की विधि (Rudraksha Dharan Vidhi)
🗓️ उत्तम दिन:
सोमवार (भगवान शिव का दिन)
श्रावण मास या महाशिवरात्रि विशेष फलदायी
अभिमंत्रित रुद्राक्ष कभी भी धारण किया जा सकता है
🕘 समय:
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पूर्व
🛕 विधि चरणबद्ध:
रुद्राक्ष शुद्ध करें:
सबसे पहले रुद्राक्ष को एक कटोरी में रखें
उसमें गंगाजल या शुद्ध जल डालें
कुछ देर तक कच्चे दूध और फिर गंगाजल से धो लें
धूप-अगरबत्ती दिखाएं
पूजन करें:
भगवान शिव, पार्वती, गणेश और अपने इष्टदेव का ध्यान करें
रुद्राक्ष को शिवलिंग पर रखें या शिव की प्रतिमा के समक्ष रखें
निम्न सामग्रियों से पंचोपचार पूजन करें:
पुष्प (फूल)
धूप
दीपक
अक्षत
चंदन या रोली
मंत्र जाप करें:
रुद्राक्ष को धारण करने से पहले निम्न में से कोई भी मंत्र 108 बार जपें:
🌿 “ॐ नमः शिवाय”
संकल्प लें:
रुद्राक्ष को किस उद्देश्य से धारण कर रहे हैं, मन ही मन संकल्प लें और भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करें।
धारण करें:
शुद्ध लाल/काले मौली धागे में या चाँदी, तांबे, सोने की चेन में पहनें
गले में या दाहिने हाथ की कलाई में धारण करें
⚠️ विशेष सावधानियाँ:
रुद्राक्ष को कभी भी गंदे स्थान पर न रखें
शराब, मांस, तामसिक भोजन से दूर रहें
रुद्राक्ष को हर शनिवार धोकर धूप दिखाएं
रुद्राक्ष को दूसरों को स्पर्श न करने दें
रात्रि में सोते समय या शारीरिक संबंध के समय उतार सकते हैं
उपलब्धता:
पूरी तरह अभिमंत्रित, शुद्ध और सिद्ध
उपलब्ध: 100% असली नेपाली/भारतीय पंचमुखी रुद्राक्ष



