🔥 हवन विधि (सरल एवं प्रभावशाली तरीका)
हवन वैदिक परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली अंग है। जब हम किसी मंत्र का जाप करते हैं, तो उसके पूर्ण होने पर उसका दशांश हवन करने का विधान होता है। हवन के माध्यम से मंत्र के देवता को आहुति अर्पित कर उन्हें संतुष्ट किया जाता है।
🕉️ हवन का उद्देश्य:
- साधना को पूर्णता प्रदान करना
- मंत्र की शक्ति को स्थूल रूप में साकार करना
- वातावरण की शुद्धि व दिव्यता
- साधक की रक्षा एवं इच्छित फल की प्राप्ति
✨ हवन सामग्री की तैयारी:
बाजार से हवन सामग्री लाएँ — ध्यान रखें कि वह शुद्ध और सात्विक हो। इसमें निम्न वस्तुएँ शामिल करें:
- गेहूं, जौ, चावल, तिल, बूरा (या शक्कर), कपूर, देसी घी, पंचमेवा
- कुछ विशेश साधना में सामग्री में कुछ विशेष मिलाया जाता है जैसे धन के लिये कमल गट्टा , बच ,कूट , इन्द्र जौ , आदि
- शहद ,दूध , आदि मिलाकर भी हवन होता है
- केवल कमल गट्टे और घी से लक्ष्मी प्राप्ति के लिये हवन किया जाता है | इसमें हवन सामग्री का प्रयोग नही होता | केवल कमल गट्टे और घी से ही किया जाता है
विशेष: लक्ष्मी साधना हेतु केवल घी और कमल गट्टा से हवन किया जाता है।
सारी सामग्री अच्छे से मिला ले
🔲 हवन स्थान की तैयारी:
- हवन कुंड हो तो उत्तम, नहीं तो जमीन पर चौका लगाकर किसी परात में हवन करें।
- आम की लकड़ी (समिधा) को आड़ी-तिरछी रखकर बीच में कपूर रखें।
- बैठते समय दिशा वही रखे जो जाप के समय रखी है।
- बीच में कपूर रखे
- पास मैं दीपक जला दें धूप अगर बत्ती जो जलानी है जला दें।
🙏 संकल्प:
- हाथ में थोड़ा चावल और जल लेकर संकल्प लें।
- घी को कटोरी में रख लें और चम्मच से डालने की व्यवस्था करें।
- अग्नि प्रज्वलित करें और अग्नि देव का आवाहन करें (चावल कुंड मे डालदें)।
🔥 हवन आरंभ:
🧘♂️ प्रारंभिक आहुतियाँ:
दायेंं हाथ की मध्यमा और अनामिका अगुली को जोडकर अगूठें से आहुति दी जाती है
फिर सबसै पहले गुरू मंत्र की तीन आहुति दें
फिर नीचे लिखे क्रम से सभी की तीन तीन आहुति दें
*ॐ रिद्धि सिद्धि सहिताय श्रीमन महा गणाधिपतये नमः स्वाहा
ॐ श्री इष्ट दैवतायै नमः स्वाहा
ॐ श्री कुल दैवतायै नमः स्वाहा
ॐ सर्वभ्यो पित्रभ्यो नमः स्वाहा
ॐ ग्राम देवतभ्यो नमः स्वाहा
ॐ स्थान देवतभ्यो नमः स्वाहा
ॐ सर्वभ्यो लोकपालभ्योनमः स्वाहा
ॐ सर्वभ्यो दिक्पालभ्यो नमः स्वाहा
ॐ नव ग्रहाये नमः स्वाहा
ॐ _श्री शची पुरन्धरभ्यो नमः स्वाहा
ॐ श्री लक्ष्मी नारायणभ्यो नमः स्वाहा
ॐ श्री उमा महेश्वरभ्यो नमः स्वाहा
ॐ श्री वाणी हिरण्यगर्भभ्यो नम स्वाहा
ॐ श्री मातृपितृचरण कमलभ्यो नमः स्वाहा
ॐ सर्वभ्यो देवतभ्यो नमः स्वाहा
ॐ सर्वभ्यो ब्राह्मणभ्यो नमः स्वाहा
ॐ रिद्धि सिद्धि सहिताय श्री मन महा गणपतये नमः स्वाहा
इनके बाद जिन मंत्रों का आपने जाप किया है, उनके मूल मंत्र से आहुति देना शुरू करें। माला से गिनती करें (बाएं हाथ में रखें)। हर आहुति के साथ थोड़ा घी भी डालते रहें।
महत्वपूर्ण:
- अग्नि बुझने न दें। बुझ जाए तो कपूर से पुनः प्रज्वलित करें।
- बुझी अग्नि में कभी भी आहुति न दें।
🌕 पूर्णाहुति:
अंत में, एक नारियल, कलावे से लपेटें और इसे मंत्र उच्चारण के साथ हवन कुंड में समर्पित करें:
“ॐ पूर्ण वेद पूर्ण आहुति पूर्ण आगम अलख सुख श्रीं ह्रीं स्वाहा”
बची हुई सारी सामग्री भी कुंड में होम कर दें।
🚶♂️ अंतिम क्रिया:
- खड़े होकर हवन कुंड की परिक्रमा करें।
- हृदय से प्रार्थना करें।
- हवन पूर्ण हुआ।
📝 महत्वपूर्ण निर्देश:
- सच्चे मन और श्रद्धा से हवन करें।
- शुद्धता और नियम का पालन अवश्य करें।
- यह विधि साधकों के लिए सरल, प्रभावी और सिद्ध है।
